Raksha Bandhan 2022: रक्षाबंधन पर ध्यान रखें यह महत्वपूर्ण बातें

Raksha Bandhan 2022: रक्षाबंधन का पर्व हर वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाते हैं। इसलिए इसे राखी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। यह तो और बहनों और भाइयों के प्रेम का प्रतीक है इस दिन बहनें अपने भाइयों की सुख समृद्धि के लिए उनकी कलाई पर राखी बांध है वही भाइयों बहनों की रक्षा करने का वचन देते हैं।

रक्षाबंधन 2022 का महत्व

Raksha Bandhan 2022: महाभारत के अनुसार भगवान कृष्ण के हाथ पर एक बार चोट लग गई थी। जिसके बाद माता द्रौपदी ने अपने पल्ले को फाड़कर श्री कृष्ण के हाथों पर बांध दिया था, इस दौरान भगवान श्री कृष्ण ने द्रौपदी को उनकी जीवन भर रक्षा करने का वचन दिया था। तब से ही पवित्र बंधन, राखी बंधन के रूप में मनाया जाने लगा।

Raksha Bandhan 2022: एक और ऐतिहासिक कथा के अनुसार चित्तौड़ की रानी कर्णावती ने राजा हिमायू को राखी भेजी थी, और अपनी रक्षा का वचन मांगा था। राजा हिमायू ने कर्णावती का सम्मान रखते हुए गुजरात के राजा से महारानी कर्णावती की रक्षा करी। और रक्षाबंधन की परंपरा की शुरुआत की थी।

रक्षाबंधन पर राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

Raksha Bandhan 2022: रक्षा बंधन के त्यौहार पर इस बार कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं, ज्योतिष के अनुसार इस दिन सुबह 11 बजकर 37 मिनट से 12 बजकर 29 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा, इसके अलावा दोपहर 2 बजकर 14 मिनट से 3 बजकर 7 मिनट तक विजय मुहूर्त रहेगा। रक्षाबंधन के दिन प्रदोष काल का मुहूर्त 11 अगस्त 2022 को रात के 8 बजकर 52 मिनट से 9 बजकर 14 मिनट रहेगा, जिसे राखी बांधने के लिए सबसे शुभ समय माना जा रहा है।

11 या 12 अगस्त किस दिन बनेगा रक्षाबंधन?

Raksha Bandhan 2022: हर साल सावन महीने की पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन मनाया जाता है इस साल पूर्णिमा तिथि 2 दिन यानी 11 और 12 अगस्त को पढ़ रही। हिंदू पंचाग के अनुसार सावन महीने की पूर्णिमा तिथि 11 अगस्त को सुबह 10:38 पर प्रारंभ होगी जो कि 12 अगस्त को सुबह 7:05 तक रहेगी ऐसे में लोग असमंजस में है कि रक्षाबंधन का त्यौहार 11 अगस्त को मनाया जाए या फिर 12 अगस्त को ज्योतिषाचार्य के अनुसार 11 अगस्त को भद्रा काल की साया होने के कारण कुछ लोग रक्षाबंधन का पर्व 12 अगस्त को मनाएंगे।

रक्षाबंधन पर कब है भद्राकाल साया

Raksha Bandhan 2022: इस साल रक्षाबंधन के दिन भद्रा काल लग रहा है, भद्रा पूंछ 11 अगस्त को शाम 5 बजकर 17 मिनट से 6 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। जबकि भद्रा मुख शाम 6 बजकर 18 मिनट से शुरू होकर रात को 8 बजे तक रहेगा। भद्रा काल की समाप्ति रात 8 बजकर 51 मिनट पर होगी इस काल में बहन भाई को राखी ना बांधे। क्योंकि इस अशुभ समय में राखी नहीं बांधी चाहिए।

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