International Tiger Day 2022: जानिए क्यों मनाया जाता है विश्व बाघ दिवस

International Tiger Day 2022: पूरे विश्व में हर साल 29 जुलाई को वर्ल्ड टाइगर डे यानी कि विश्व बाघ दिवस मनाया जाता है बाघों के संरक्षण के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए 29 जुलाई को बाघ दिवस मनाया जाता है बाघों के संरक्षण को लेकर भारत अब दुनिया के दूसरे देशों की मदद भी करेगा।

विश्व बाघ दिवस का उद्देश्य

International Tiger Day 2022: विश्व बाघ दिवस का उद्देश्य बागों के प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा और बाघ संरक्षण के मुद्दों पर लोगों को जागरूक करना है, जिससे बाघों की रक्षा हो सके और पूरे विश्व में बाघों की संख्या को बढ़ाया जा सके।

अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस का इतिहास

International Tiger Day 2022: सन 1973 में भारत में बाघों की आबादी को पुनर्जीवित करने के लिए प्रोजेक्ट टाइगर लांच किया, और सन 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग टाइगर समिति में पहला विश्व बाघ दिवस International Tiger Day 2022 मनाया गया था। टाइगर रेंज वाले कुल 13 देशों ने वर्ष 2022 तक जंगली बाघों की आबादी को दोगुना करने का वैश्विक लक्ष्य तय किया था। तभी से हर साल बाघ संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए और देशों द्वारा हस्ताक्षरित समझौते की याद के रूप में 29 जुलाई को विश्व बाघ दिवस मनाया जाता है।

पर्यावरण के लिए बाघ क्यों जरूरी है

  • पर्यावरण के लिए बाघ इसीलिए जरूरी है क्योंकि बाघों को फुड चैन का हिस्सा माना जाता है, जिसके वजह से वातावरण अनुकूल रहता है।
  • बाल आमतौर पर हिरणों का शिकार करते हैं एक बड़े हिरण को खाकर वह 1 हफ्ते तक अपनी भूख मिटा सकते हैं।
  • अगर बात जैसे मांसाहारी जानवरों की कमी हो गई तो घास फूस खाने वाले पशु ज्यादा मात्रा में पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

विश्व बाघ दिवस कब मनाया जाता है

International Tiger Day 2022: पूरी दुनिया में 29 जुलाई के दिन बाघों के संरक्षण के लिए वर्ल्ड टाइगर डे मनाया जाता है साल 2010 में रूस के सेंट पीटर वर्ग में इसे मनाए जाने की घोषणा हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर के मात्र 13 देशों में ही बाघ हेलो हैं, हालांकि अच्छी बात यह है कि इसके 70% बाघ सिर्फ भारत में है।

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विश्व बाघ दिवस 2022 की थीम क्या है?

International Tiger Day 2022: प्रत्येक वर्ष विश्व बाघ दिवस के लिए नई टीम जारी की जाती है इस वर्ष विश्व बाघ दिवस 2022 की थीम “बाघों की आबादी को पुनर्जीवित करने के लिए भारत में प्रोजेक्ट टाइगर लांच किया” है

भारत में सबसे ज्यादा बाघ कहां पाए जाते हैं?

International Tiger Day 2022: देश में बाघों की जनगणना हर 4 साल में की जाती है जिससे उनकी ग्रोथ रेट का पता लगाया जाता है साल 1973 में देश में मात्र 9 टाइगर रिजर्व ही थे जिस की संख्या बढ़कर अब 51 हो गई है बता दें की भारत के मध्य प्रदेश राज्य में सबसे ज्यादा बाघ पाए जाते हैं।

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भारत के 5 सबसे बड़े टाइगर रिजर्व

  1. रणथंभौर टाइगर रिजर्व: रणथंभौर टाइगर रिजर्व भारत के राजस्थान राज्य में स्थित है यह 1.134 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला है।
  2. कान्हा टाइगर रिजर्व: कान्हा टाइगर रिजर्व भारत के मध्य प्रदेश राज्य में स्थित है यह टाइगर रिजर्व प्रदेश का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है यहां बाघ के अलावा अन्य के जीव जंतुओं की प्रजाति भी मौजूद है।
  3. मानस राष्ट्रीय उद्यान: मानस राष्ट्रीय उद्यान यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल पर घोषित है यह जगह 39 हजार 100 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है।
  4. पेरियार टाइगर रिजर्व: पेरियार टाइगर रिजर्व भारत के केरल राज्य में स्थित है यहां पर बंगाल टाईगर, सफेद बाघ, एशियाई हाथी, जंगली सूअर और सांभर हिरण जैसे जानवर पाए जाते हैं।
  5. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व भारत के मध्य प्रदेश राज्य में स्थित है और यहां पर रॉयल बंगाल टाइगर की सबसे ज्यादा आबादी पाई जाती है इसका क्षेत्रफल 820 वर्ग किलोमीटर है।

पूरे विश्व में बाघों की कितनी प्रजातियां पाई जाती है

International Tiger Day 2022: पूरी दुनिया में बाघों की कई तरह की प्रजातियां पाई जाती है जिसमें से 6 प्रजातियां ही मुख्य हैं

  1. साइबेरियन बाघ
  2. बंगाल बाघ
  3. इंडो चाइनीस बाघ
  4. मलायन बाघ
  5. सुमात्रा बाघ
  6. साउथ चाइना बाघ शामिल है

विलुप्त बाघ प्रजातियां

  1. बाली टाइगर
  2. कैस्पियन टाइगर
  3. जावन टाइगर
  4. टाइगर हाइब्रिड

विश्व टाइगर दिवस कब मनाया जाता है?

विश्व बाघ दिवस 29 जुलाई को मनाया जाता है।

भारत में सबसे ज्यादा बाघ किस राज्य में पाए जाते हैं?

भारत के मध्य प्रदेश राज्य में सबसे ज्यादा बाघ पाए जाते हैं।

विश्व टाइगर दिवस 2022 की थीम क्या है?

“बाघों की आबादी को पुनर्जीवित करने के लिए भारत में प्रोजेक्ट टाइगर लांच किया” है

विश्व बाघ दिवस 2021 की थीम क्या थी?

“उनकी उत्तरजीविता हमारे हाथों में हैं”।

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